हमाल भाइयों का आंदोलन किस लिए?

by | Feb 9, 2022

‘आवाज दो हम एक है… ‘हम हमारा अधिकार मांगते, नहीं किसी से भीख मांगते’, ‘हमाल एकता जिंदाबाद‘ – ऐसे घोषणा देते हुए सुमेरपुर, पाली, राजस्थान में हमालों का आंदोलन हुआ। १८ दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर यह आंदोलन करके हमाल मजदूरों ने अपनी मांगे प्रशासन के सामने रखी। आंदोलन के तुरंत बाद मैंने एक वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड किया जिसमे मेरे मेंटर सरफराज़ जी हमाल मजदूरों के साथ गीत गा रहे थे। मुझे काफी लोगो ने अलग-अलग माध्यम से एक ही सवाल पूछा “क्यों ?” “यह आंदोलन किस लिए ?

सुमेरपुर में हमाल काम करने के लिए आने वाले लोग ज्यादातर गांव से या आदिवासी क्षेत्रों से हैं। सुमेरपुर एक व्यावसायिक तालुका है जहाँ हजारों की संख्या में मंडी व बाज़ार में हमाल मज़दूर माल ढ़ोने का कार्य करते है| यहाँ पर किराना, टिम्बर मार्केट, लोहा बाजार के साथ-साथ ऑटो मोबाईल का कार्य बड़े स्तर पर होता है। यहाँ १५०० से २००० की संख्या में हमाल मज़दूर काम करते है, जिनको सरकार की तरफ से कोई भी सामाजिक सुरक्षा या किसी प्रकार की योजना उपलब्ध नहीं है। यहा मजदूरों की समस्या एवं मुद्दों के समाधान हेतु एक हमाल मज़दूर संगठन बना हुआ है जो उनके हित के लिए काम करता है। यह होने के बाद भी बाजार में हमालों का बड़े स्तर पर शोषण हो रहा है।

राजस्थान के अलग अलग शहरों में मिलाकर ५० हजार से भी ज्यादा हमाल है, जो हर दिन जोखिम भरी स्थितियों में कार्य करते है। इन कामों में हर दिन कोई न कोई घटना होती है, जिसके लिए इन्हे सरकार या किसी भी संस्था की तरफ से कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है। इन्ही सब कारणों की वजह से हमाल मजदूरों ने एक होकर यह आंदोलन किया और प्रशासन के सामने अपनी मांगे रखी।

वर्तमान सरकार ने हमाल मजदूरों के लिए घोषणा पत्र में कहा है की उनके अधिकार के लिए वह सुरक्षा बोर्ड का गठन करेंगे जिसमे इन मजदूरो का रजिस्ट्रेशन करके उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जायेगा| सरकार का कहना है यह करने से हमाल मज़दूर अधिक संख्या में अपनी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। पर यह बोर्ड सिर्फ कागज पर ही रह गया है| ३ साल हो गए लेकिन राजस्थान सरकार की तरफ से इन हमाल मजदूरो के लिए कुछ काम नहीं हुआ।

इसी के साथ राजस्थान सरकार को बोर्ड गठन करने से पहले इसे अच्छे से करने की रणनीति बनाना जरुरी है। यह करने के लिए स्थानीय स्तर पर कार्य करने वाले संस्थाओं या संगठनों के साथ महाराष्ट्र के पुणे शहर में सरकार द्वारा संचलित हमाल बोर्ड देखने के लिए एक दौरा करना चाहिए ताकि उनके प्रक्रिया को समझकर राजस्थान हमाल मज़दूरों का बोर्ड शुरू से ही मज़बूत बन सके।

सुमेरपुर शहर में काम करने वाले मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के लिए भी आंदोलन द्वारा मांग की गयी थी क्योंकि पिछले पांच सालों से यहाँ मजदूरों की आमदनी नहीं बढ़ी है। मजदूर द्वारा मजदूरी बढ़ाने की मांग करने पर उसे डराया धमकाया जाता है। कार्य स्थल पर किसी भी तरह की घटना में मजदूर का कोई साथ नहीं दिया जाता| और तो और, अगर संगठन द्वारा आवाज उठायी जाये तो उन्हें थोड़े पैसे देकर चुप कर दिया जाता है।

वर्तमान में कृषि मंडी में कार्य करने वाले श्रमिकों के लिए सरकार की तरफ से किसान कलेवा योजना का लाभ दिया जाता है। परन्तु बाजार में काम करने वाले हजारों हमालों में से किसी को भी किसी योजना का लाभ नहीं है। साथ ही मंडी में काम करने वाले श्रमिकों को मंडी की तरफ से रहने के लिए आवास की सुविधा है। पर बाजार में काम करने वाले मजदूरों को रहने के लिए सुविधा भी नहीं है। उन्हें कम दाम पर भोजन, आवास की सुविधा सुनिश्चित होनी चाहिए।

हर शहर में हमालो के लिए अलग से भवन होना उचित होगा| राज्य में हजारों मजदूर काम करते है। अगर किसी मजदूर के पास काम नहीं हो तो उसके बैठने के लिए एक निश्चित स्थान हो या ऐसे भवन की व्यवस्था हो जहाँ सभी श्रमिक इकठ्ठा हो कर अपने हक एवं अधिकारों की बात कर सके। या फिर किसी भी नियुक्त को हमाल की ज़रुरत हो तो वो यहाँ आ कर उन्हें ले जा सके।

यह मांगे पूरी होंगी इसी उम्मीद की किरण को खोजते हुए यह हमाल भाई आंदोलन की मशाल लेकर निकले हैं। हम उम्मीद करते हैं की इन्हे इनकी हक़ की मंजिल जल्द ही मिल जाए।

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