स्केल कैसे होगा?

by | Jun 10, 2016

स्केल कैसे करेंगे? इस विषय में उचित सवाल है कि क्या तरीका पहले चल रहे TB प्रोग्राम जैसा होगा या अनुभव वाले साथी जाके नया वार्ड शुरू करें या कुछ और?

दो वार्डों में पायलट की समाप्ति के बाद संस्था के कार्य के दायरे को बढ़ाना स्वाभाविक मोड़ है। साथ ही, हमने ट्रस्ट को जो माता और शिशु स्वस्थ्य सम्बन्धी परिकल्पना का प्रपोसल दिया था, उसमें हमने दूसरे साल में कुल २० वार्डों में काम करने का आश्वासन दे रखा है। आशा कार्यकर्ताओं और सदस्यों की भी पिछले साल भर से ट्रेनिंग हो रही है। लेकिन इस सबके परे सबसे महत्त्वपूर्ण सवाल है कि क्या हम तैयार हैं? तैयारी से मेरा मतलब हमारी कार्यक्रम के उद्देश्य की समझ, गतिविधियों और कार्यप्रणाली की मजबूती, मॉनिटरिंग का पुख्ता इंतज़ाम, सभी सम्बंधित साथियों की दुरुस्तता है। तैयारी में पिछले वार्डों में हुई गलतियाँ और उनसे मिले अनुभवों से कार्यक्रम को संवारना भी शामिल है। हालांकि यह तैयारी कभी भी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन समुदाय को अच्छी सेवा और कार्यक्रम की सफलता के लिए इस तैयारी का एक न्यूनतम स्तर ज़रूरी है।

पायलट वार्डों को कार्य शुरू करने के लिए दो कारणों से चुना गया: सबसे पिछडा हुआ वार्ड और अस्पताल से दूरी।

पायलट में मुख्य भूमिका मेंबर्स की रही जिसने हमारी सोच और दृष्टिकोण दोनों को मजबूती दी। इसी दौरान हमारे बाकी साथियों को भी धीरे-धीरे मातृ और नवजात स्वास्थ के काम में शामिल किया गया। सभी को कुछ प्रोजेक्ट मिले जिनको उन्होंने सम्भालना शुरू किया।इसी सिलसिले में एक समझ पक्की हुई की काम आशा कार्यकर्ताओं के ही माध्यम से बढ़ाया जाएगा।  

स्केल करने का मौका अप्रत्यक्ष रूप से आशा को सम्मानित करने का मौका भी है।सम्मानित TB में किये गए बेहतरीन कार्य के लिए और उनके विभिन्न प्रयासों के लिए। इन प्रयासों में साइकिल और पढ़ाई जैसे कई कार्य आ सकते हैं। सोच है कि यदि आप किसी को उनके बेहतरीन कार्य के लिए मान्यता देते हैं तो उसका असर बाकी लोगों पर भी पड़ता है। दूसरे लोग भी अच्छा काम करने के लिए प्रेरित होते हैं और वह व्यक्ति स्वयं भी गौरवान्वित महसूस करता है। साथ ही संस्था का कर्त्तव्य भी है कि वह उसके उच्चस्तर के कार्यकर्ताओं को पहचाने और उनकी सराहना करे।

सराहना के भी कई तरीके संभव हैं: दो मुख्य हैं, आर्थिक और समाज में सम्मान। हाँलाकि आर्थिक प्रोत्साहन देना भी अपनी जगह ज़रूरी है, लेकिन सम्मान उससे कहीं भारी वज़न रखता है।

उदाहरण के तौर पर: किसी के बेहतरीन कार्य पर उनके परिवार और कार्यकर्ताओं के सामने उनके लिए महत्त्वपूर्ण व्यक्ति से पुरुस्कृत करवाना। सभी प्रयास मूल्यात्मक हों ऐसा ज़रूरी नहीं; अक्सर, प्रतीकात्मक पुरस्कारों का प्रभाव इंसान के अंतर्मन तक उतरता है। इसी बीच यह भी ध्यान रखना अतिमहत्त्वपूर्ण है कि कहीं इस सराहना की दौड़ में आप हालातों से मजबूर व्यक्ति को अनजाने में दण्डित तो नहीं कर रहे। जैसे: किसी विवाहित महिला का आते हुए भी खुलेआम साइकिल न चला पाना समाजिक परिस्थितियाँ दर्शाता है। उनको इसलिए कम आँकना कि वह सामजिक कुरीतियों के खिलाफ मोर्चा नहीं उठा रहीं जायज़ नहीं है। इस प्रक्रिया में सन्तुलन बनाए रखना नाज़ुक लेकिन अतिआवश्यक है। सन्तुलन न बनाने पर संस्था के सबसे काबिल लोग ही निराश होने लगेंगे जिससे काम पर देर-सवेर कुप्रभाव दिखेगा।

स्केल करना अपने आप में अंत नहीं है। इसे एक प्रक्रिया मात्र की नज़रों से देखना आवश्यक है। ज़्यादा ज़रूरी है अपनी समझ और साथियों को साथ लेकर चलना।

तुषार का यह लेख अपने लिखे एक ईमेल का विस्तार है। अपने आप को गहराई से वाकिफ़ कराते रहना और साथियों से चर्चा में रहना ज़रूरी है।

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