डीएनटी समुदाय के साथ सामुदायिक कार्यक्रम

by | Jan 10, 2023

आज़ादी के बाद स्वतंत्र भारत में आधुनिक दौर का आरंभ करते हुए आपराधिक जनजाति अधिनियम – Crimal Tribes’ Act (CTA) को 1952 में निरस्त कर दिया गया. जिसमें विमुक्त और घुमंतु जनजातियों को आपराधिक जनजातियों के रूप में दर्ज किया गया था. अधिकारियों द्वारा एक निश्चित समूह को अपराध के कलंक से मुक्त करने के लिए CTA को 1953 के आदतन अपराधी अधिनियम से बदल दिया गया था. हालांकि आपराधिक अधिनियम मे कई प्रावधानों को शामिल कर लिया. जिसकी वजह से पुलिस इन प्रावधानों का इस्तेमाल उन जनजातियों पर अत्याचार करने के लिए लगातार करती थी.

इसलिए वे समाज के बीच हाषिए पर रहते हैं| इनका कानून प्रवर्तन निकायों द्वारा उत्पीड़न किया जाता है। इसने न केवल उनके काम और आय के स्त्रोतों को बाधित किया, बल्कि परिवर्तन के साथ में रहने की उनकी क्षमताओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला। तब से विमुक्त समुदाय छोट-बड़े समूहों में समाज के हाषिये पर रहते आ रहे हैं। ये अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के रूप में भारत के कई राज्यों में बसे हैं पर अनुसूचित जनजातियों और अनुसूचित जातियों की तुलना में अधिक हाषिए पर हैं। हालांकि इस वर्गीकरण में कोई एकरूपता और औचित्य नहीं है। ये अपने नागरिकता के अधिकारों और अपने मुद्दों के दीर्धकालिक समाधान के लिए एक साथ आने में असमर्थ हैं।

डीएनटी समुदाय के लोग क्या काम करते है ?

डीएनटी समुदाय में बावरी, गाडिया लोहार, भोपा, मोग्या, कंजर, कालबेलिया समुदायों के लोग आते हैं| समुदाय के लोग मेहनत-मजदूरी, कचरा बीनना, कांच के खिलौने बनाकर बेचना, प्लास्टिक से बने सस्ते सामान बेचना, लोहे के औजार बनाना, नाच-गाना दिखाना, ढोल-नगाड़े बजाना आदि कार्यों को रोजगार के तौर पर पूर्ण कर अपना जीवन यापन करते हैं। अन्य समाजों की धारणा डीएनटी समुदायों के प्रति यह बनी हुई है कि ये लोग चोरी-चकारी, लूट-पाट करते, रात के समय चोरी करते, शराब का सेवन व विक्रय भी करते हैं, इनका रहन-सहन बहुत ही गंदा होता है जिसके कारण अन्य समाजों के लोग इनसे दूरी बनाये रखते हैं। आपने शायद इनके बारे में नेटफ्लिक्स की सीरीज़ दिल्ली क्राइम के सीज़न 2 में देखा-सुना हो।

पिछले कुछ वर्षों से मशीनीकरण का कार्य बढ़ने, रोज़गार-धन्धों की कमी हो जाने का प्रभाव इन लोगों पर बहुत ही विपरित पड़ा है जिसके कारण इनकी स्थिति पहले से भी दयनीय होती जा रही है। जैसे-लोहार का काम लोहे के औजार बनाना होता है परन्तु अब मशीन द्वारा बने-बनाये सस्ते औजार बाजारों में आसानी से मिलने लगे हैं। मोग्या समुदाय का रोज़गार जंगलों से जुड़ा हुआ था। परन्तु अब वन विभाग द्वारा जंगल में प्रवेश करने एवं लकड़ी काटने, मवेशी चराने, जंगलों से जड़ी-बूटियां आदि गतिविधियों पर रोक लगाने के कारण इनका भी रोज़गार समाप्त हो गया है।

एक स्थान से दूसरे स्थान पर पलायन करते रहना एवं पैसों की कमी जैसे कारणों की वजह से ये लोग अपने बच्चों को शिक्षा से नहीं जोड़ पाते हैं।

डीएनटी समुदाय में आने वाली विशेष जातियों के बारे में और जानकारी की तो पाया कि इनकी समस्याओं की सूची तो बहुत बड़ी है | जैसे राशन नहीं मिलना, सरकारी चिकित्सा की सुविधा नहीं मिलना, सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाना, परम्परागत काम-धन्धों का बंद हो जाना, दस्तावेजों का अभाव, पक्के मकानों का अभाव, रोज़गार की समस्या, समाज की मुख्यधारा से अलग-थलग पड़ जाना, बच्चों का शिक्षा से वंचित रहना, साफ-सफाई का अभाव, बीमारियों से ग्रसित रहना, भरपेट भोजन नहीं मिलना आदि। 

ग्रामीण शिक्षा केंद्र संस्था का काम

ग्रामीण शिक्षा केंद्र, जहाँ मैं काम करता हूँ, उन्होंने सोचा इनकी हम किस तरह से मदद कर सकते हैं| डीएनटी समुदायों के साथ संस्था ने अनौपचारिक रूप से कार्य उदय सामुदायिक पाठशाला, फरिया के प्रारम्भ (वर्ष 2009) से कर लिया था । उस पाठशाला में डीएनटी से भोपा समुदाय के बच्चों को विद्यालय से जोड़कर उनके साथ शिक्षण पर कार्य किया जाने लगा | परन्तु उस समय उदय पाठशाला की शिक्षक टीम केवल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण तक ही सीमित थी। 

संस्था द्वारा डीएनटी कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत वर्ष 2017 में की गई। जिसमें संस्था के कुछ शिक्षकों द्वारा डीएनटी समुदाय का सर्वे कर समुदाय के साथ कार्य प्रारम्भ किया गया। सर्वे के दौरान मुख्य रूप से पाया गया कि अधिकतर परिवारों के पास तो मूलभूत दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, राशन कार्ड, पहचान पत्र, बैंक खाता ही नहीं बने हैं।

इन समुदायों के लगभग 95 प्रतिशत लोग व बच्चे अशिक्षित हैं। इनकी आर्थिक स्थिति भी बहुत ही कमजोर है। बहुत से परिवार तो केवल त्रिपाल की झोपड़ी बनाकर उसमें ही निवास कर रहे हैं।

औपचारिक रूप से कार्य की शुरुआत

इसके पश्चात डीएनटी समुदाय के साथ औपचारिक रूप से कार्य करने के लिए टीम की नियुक्ति की गई जिसमें मैं टीम लीडर के तौर पे कार्य कर रहा हूँ। मैं इन समुदायों के साथ दस्तावेज बनवाना, नशे-आपराधिक गतिविधियों से दूर करना, कानूनी नियमों की जानकारी प्रदान करना, चिकित्सा कार्यों में मदद करना आदि कार्य करता हूँ।

बच्चों के साथ शिक्षण को लेकर वर्ष 2020 में कार्य बावरी बस्ती से प्रारंभ किया गया। समुदाय के सर्वे के पश्चात इनके साथ कार्य करने की एक योजना बनाई गई। इनमें प्रमुख रूप से इनके साथ मासिक एवं पाक्षिक बैठकें कर इनकी समस्यायें एवं उनके समाधान हेतु किये जाने वाले कार्यों की चर्चा का आयोजन करना तय किया गया। समुदाय के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए इनकी बस्ती में अनौपचारिक शिक्षण केन्द्र खोला जाना जिससे की बस्ती के बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा सके एवं उन्हें नजदीकी सरकारी विद्यालय में भेजा जा सके। कोविड-19 के समय जागरूकता, बचाव, टीके लगवाने हेतु प्रेरित करना। समुदाय को राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से जागरूक करना आदि बिन्दुओं को लेकर उनके साथ कार्य प्रारम्भ किया गया।

डीएनटी समुदाय के साथ कार्य करने के लिए इन समुदाय से ही शिक्षित महिला-पुरूषों का चयन कर उन्हें नियुक्त किया गया। बच्चों के साथ शिक्षण कार्य करने वाले लोगों को शिक्षा साथी नाम दिया गया। समुदाय के साथ दस्तावेजों एवं आजीविका संबंधी कार्यों को लेकर कार्य करने वाले व्यक्ति को आजीविका साथी एवं समुदाय की कानून सबंधी, प्रशासनिक संबंधी कार्यों की सहायता करने वाले लोगों को कानून साथी नाम दिया गया। इन लोगों को पहले इनसे संबंधित पूर्ण किये जाने वाले कार्यों की जानकारी देकर प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद फिल्ड में संस्था शिक्षकों की मदद से कार्य करने का अभ्यास करवाया गया। फिर इन्हें कार्यों की जिम्मेदारी दी गई।

समुदाय के लोगों के साथ

डीएनटी समुदायों के साथ कार्य करते समय आने वाली समस्याएं

इन समुदायों के साथ कार्य करने में सबसे बड़ी समस्या यह आई कि शिक्षित लोग नहीं मिले। बच्चों को पढ़ाने के लिए जो किशोरियाँ और पुरूष शिक्षा साथी का काम कर रहे हैं वे खुद कक्षा 2-3 के स्तर तक भी शिक्षित नहीं है। जो आजीविका साथी और कानून साथी काम कर रहे हैं वे भी अपना नाम सही से नहीं लिख सकते।

हमने तय किया था कि यदि इस समुदाय के साथ काम करना है तो समुदाय के व्यक्तियों को साथ लेकर ही किया जा सकता है। अन्य समुदाय के लोग या तो इनके साथ बेहतर तरीके से कार्य नहीं कर पायेंगे या इस समुदाय में घुल-मिल नहीं पायेंगे।


हम धीरे-धीरे अपने कार्यों में सफलता प्राप्त कर रहे है। हांलाकि कुछ बिन्दुओं पर कार्य की गति बहुत ही धीमी है। इन समुदाय में चार शिक्षण केन्द्रों के माध्यम से लगभग 100 बच्चों के साथ कार्य किया जा रहा है। इन बच्चों की समझ बनते ही इन्हें नजदीकी सरकारी विद्यालय से जोड़ दिया जाता है। ज्यादातार परिवारों के प्रमुख दस्तावेज बनवा दिये हैं। प्रशासन एवं राजनीतिक व्यक्तियों से सम्पर्क कर इनकी मूलभूत सुविधाओं से संबधित समस्याओं को सामधान करने का प्रयास जारी है।

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