जानकी अम्मा – एक विश्वास और उम्मीद

by | Aug 2, 2023

जन स्वास्थ्य सहयोग (JSS) छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में एक छोटे से गाँव गनियारी में स्थित है. यह संस्था लोगों के स्वास्थ्य पर काम कर रही है, विशेष रूप से उन आदिवासी और पिछड़े लोगों के लिए, जो बिलासपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं और स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं. इन लोगों को अक्सर झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनकी सम्पूर्ण कमाई खर्च हो जाती है. JSS ने इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए तीन क्लस्टर बनाए जहां लोग निशुल्क इलाज प्राप्त कर सकते हैं. इन्हें हम सब रोज़ की बोलचाल की भाषा में सेंटर कहते हैं.

यहाँ आने पर मेरा पहला फील्ड विज़िट JSS के शेमरिया सब सेंटर में था, जो अचानकमार टाइगर रिज़र्व के पास है और बफर ज़ोन में आता है. मैंने अपनी जॉइनिंग के दिन से ही जानकी अम्मा के बारे में बहुत कुछ सुना था, और उस दिन मुझे उनसे मिलने का मौका मिला. वहां पर बहुत सारे मरीज और उनके साथ आने वाले लोगों की भीड़ थी. अम्मा अपने केबिन में बैठ कर मरीजों चेकअप कर रही थीं और उनके स्वास्थ्य से जुड़ी हर जानकारी को विस्तार से लिख रही थीं. इसे हम मरीज की हिस्ट्री कहते हैं, ताकि उसकी दिक्कत के जड़ तक जाकर समस्या के मूल कारण के बारे में पता लगाया जा सके.

जब तक जानकी अम्मा व्यस्त थीं, तब तक मैंने कुछ मरीजों से बातचीत की। उन्होंने मुझे बताया कि जानकी अम्मा उनके लिए देवी सामान हैं। अगर वह आज यहां नहीं होतीं, तो उनकी पत्नी जीवित नहीं रह पाती। वे कहते हैं कि अम्मा सबको अपने बच्चे की तरह समझती हैं और उनका उत्तम ख्याल रखती हैं।

जानकी अम्मा

अम्मा बताती हैं कि उन्होंने JSS की स्थापना के समय से कार्य करना शुरू किया था और अब तक करीब २३ साल हो गए हैं. वे पिछले १३ सालों से महिला समूह की सदस्य हैं, और अभी सचिव की भूमिका भी निभा रही हैं. उनका समूह बचत, व्यवसाय और गांव की समस्याओं पर काम करता है.

पहले अम्मा बस अपने घर का काम करती थी और साथ-ही-साथ पढ़ाई भी करती थी. जब उनके गांव में आंगनवाड़ी आई तो उन्होंने वहाँ पढ़ाने का काम करना शुरू किया. वे कहती हैं कि उन्हें घर से बाहर निकलकर काम करना अच्छा लगता है, इसलिए उन्होंने घर के काम के साथ आंगनवाड़ी में पढ़ाने का सोचा. लेकिन यह बात उनके पति को पसंद नहीं आई और गांव के लोग उनके ख़िलाफ़ उनके पति के कान भरा करते थे जिससे घर में रोज़ लड़ाई होती थी. उनके पति शराब भी पीते थे, और पी कर घर में झगड़ा करते थे. फिर भी, उन्होंने इन सभी चुनौतियों को नज़रअंदाज़ किया और अपने जीवन स्तर को बेहतर बनाने व अपने बच्चों को अच्छा भविष्य देने की कोशिश की.

जानकी अम्मा बताती हैं कि उनकी ज़िन्दगी में बड़ा बदलाव तब आया जब वो JSS से जुड़ीं. पहले उन्हें विलेज कार्यकर्ता के रूप में चुना गया और उसका प्रशिक्षण दिया गया. उनका काम था गांव में बीमार लोगों का ध्यान रखना था, और जब किसी की स्थिति खराब होती तो उन्हें JSS के गनियारी हॉस्पिटल में ले जाना और उनके साथ वहाँ रुकना. उनके पति को यह बात पसंद नहीं आई और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ने लगीं. इसके अलावा भी वे न तो घर में पैसे देते थे, न ही बच्चों की परवरिश या उनकी शिक्षा के बारे में सोचते थे. लेकिन अम्मा इन सब मुसीबतों को झेलते हुए भी अपने काम से पीछे नहीं हटीं. एक दिन उनके पति ने घर छोड़ दिया.

अम्मा ने इन सभी चुनौतियों का सामना किया, और अपने बच्चों के साथ-साथ गाँव वालों के स्वास्थ्य पर ध्यान देने में जुट गई. 2007 में अम्मा को सीनियर हेल्थ वर्कर के तौर पर प्रमोट किया गया. इस पद के लिए उन्हें 9 महीने की व्यापक ट्रेनिंग लेनी पड़ी. तब से अब तक, अम्मा ने सीनियर हेल्थ वर्कर के रूप में उम्मीदवारों की सेवा की है और उन्हें इसकी बहुत खुशी है. उन्होंने अपने करियर के दौरान कई जिंदगियाँ बचाई हैं.

सेण्टर

लेकिन अम्मा की जिंदगी में एक घटना ऐसी है जिसे वो अभी तक नहीं भूल पाईं हैं. एक बार, उनके सेंटर से जाने के बाद एक मरीज की मृत्यु हो गई थी. उन्हें इस पर बहुत दुःख और पछतावा महसूस हुआ और इस दुःख में उन्होंने सात दिन तक खाना नहीं खाया. यह कहानी बताते हुए वो कहती हैं कि सांप के काटने का केस था. परन्तु, मरीज और उसके परिवार ने उसके पैर के ऊपर से एक छछुंदर को जाते हुए देखा था. वे अम्मा से यह कह रहे थे कि वो सिर्फ सुई लगा दें. अम्मा ने भी इतना ध्यान नहीं दिया और इंजेक्शन लगा दिया. शाम को उन्हें पता चला कि उस मरीज की तबियत और ख़राब हो गई है. उसे सेंटर से हॉस्पिटल भेजा गया, लेकिन वह रास्ते में ही चल बसी.


जानकी अम्मा की कहानी हमें बहुत कुछ सिखाती है. उनके चेहरे पर हमेशा एक मुस्कुराहट रहती है, जो उनकी सभी तकलीफों को हरा देती है. उन्होंने अपने संघर्ष के द्वारा अपने बच्चों को एक अच्छा भविष्य दिया है और उनके पति ने वापस आकर उनके साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने अपनी जिंदगी में हर कठिनाई का सामना करके उसे पार किया और आज वह खुश व संतुष्ट हैं.

जानकी अम्मा की तरह यहाँ बहुत सारी महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार होती है और कई अपने आप से हारकर उसी जीवन को स्वीकार कर लेती हैं, जबकि कुछ लड़ते-लड़ते टूट जाती हैं. इस क्षेत्र की महिलाओं में आगे बढ़ने, और अपने बच्चों और परिवार को एक बेहतर जीवन देने की ललक है. लेकिन वो समाज की पुरानी धारणाएं, शराबी पतियों, और उनके अत्याचार से बहुत ही विघ्नित हैं. ऐसे में वे अपने कदम पीछे खीचती हैं. यदि कोई महिला अपने पति से कानूनी रूप से तलाक लेती है, तो उसे अपने समाज में एक लाख रुपये देने पड़ते हैं. अगर वह पैसा नहीं दे पाती, तो उसे अपना घर छोड़ना पड़ जाता है, उसके बच्चों की शादी नहीं होती और वह उनके लिए कुछ नहीं कर पाती है. पति चाहे शराब के नशे में उनको मार ही क्यों न दे, कितनी भी गलती करे, वह तलक नही ले सकती. यहाँ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पास देने के लिए पैसे नही होते हैं जिससे वे समाज की बंदिशों से बाहर निकल पाएं.

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2 Comments

  1. Vikram Kandukuri

    I want to meet Janaki Amma! Great read!

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  2. Mahema Ananthakrishnan

    Well written Surya!!!

    Reply

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