गंजे लोगों की पंचायत

गंजे लोगों की पंचायत

“गंजे लोगों की पंचायत” एक सामूहिक आईना है — जहाँ बातों की चहचहाहट में मुद्दे गुम हो जाते हैं। यह कविता, व्यंग्य और आत्मस्वीकृति का एक ऐसा मेल है जो चुभता भी है, हँसाता भी।